Vaibhavshree (Self Help Group)

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वैभवश्री

 

अपने राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाना यही हम सभी का अंतिम ध्येय है। इस हेतु  स्वावलंबी, स्वाभिमानी, संस्कारित, समरस युक्त एवं संगठित समाज का निर्माण अत्यंत ही आवश्यक  है।वैभवश्री इसी उद्देश्य को सफल  बनाने का एक मार्ग है| वैभवश्री, राष्ट्र को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक पक्ष से सतत बनाने का एक प्रयास है|

 

स्वयं सहायता समूह भारत में पिछले ३० वर्षो से स्वयंसेवी संस्थाओ, शासकीय विभागों , गैर सरकारी संगठन द्वारा  गठन की जा रही है | १० से २० महिलाये या पुरषो के समूह जो एक उद्देश्य से मिल कर समूह का गठन करते है, वैसे समूहों को स्वयं सहायता समूह कहा जाता है | देश मे लगभग १ करोड़ से भी ज्यादा स्वयं सहायता समूह का संचालन हो रहा है  | लेकिन ध्यान देने की यह बात है की सारे संस्था उन समूहों को केवल आर्थिक स्वावलंबन एवं बचत के ही दृष्टिकोण से कार्यरत है | सामाजिक और सांस्कृतिक विषयो कि आभाव उनके कार्यप्रणाली मे देखने को मिलती है | जिसके कारण समूह केवल बचत एवं बैंकिंग प्रणाली के परिसीमा में ही बंध कर रह जाती है |

 

एक सस्कत समाज का निर्माण के लिए आर्थिक पक्ष के साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों का समागम अत्यंत ही आवश्यक है |  इन्ही बिंदु को ध्यान में रख कर संन २०१६ में राष्ट्रीय सेवा भारती के माध्यम से वैभव श्री की शुरुवात हुई|

 

भारत की जनसँख्या में महिलाओ का दर ५० % की है, राष्ट्र को परम वैभव में ले जाने के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण  आवश्यक है | वैभवश्री इन्हीं मातृशक्तियों को सशक्त राष्ट्र पूर्ण निर्माण का ध्येय  में  सम्मिलित करने का एक माध्यम है|

 

भारत के विभिन्न हिस्सों में शहर से ले कर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रांत सेवा संस्था के माध्यम से वैभवश्री (स्वयं सहायता समूह) का गठन करना एवं जो गठित समूह है उनको अपने विचारों से जोड़ने की योजना ले के अपने कार्य में अग्रसर हैं|

 

वैभवश्री केवल आर्थिक सशक्तिकरण  प्रदान करने में केंद्रित नहीं है अपितु इसका उद्देश्य समूहों के माध्यम से समूह के सदस्यों के अन्दर आर्थिक पक्ष के साथ सामाजिक चेतना को जागृत करने का है|  वैभवश्री समूहों के सदस्यों को समाज सेवा करने के लिए प्रोत्साहित करती है और इस प्रयास से सम्पूर्ण भारतवर्ष में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से विभिन्न  क्षेत्रों में सेवा कार्यों का उदाहरण देखने को मिलता है|

 

वैभवश्री का सबसे अनूठा कार्य पद्यति उसकी साप्ताहिक बैठक है| इस साप्ताहिक  बैठक में हर एक सदस्यों को बैठक की अलग-अलग जिम्मेवारी देना और क्रमशः हर एक सदस्यों के घर में ही बैठक का आयोजन करना  इसकी की मुख्य विशेषता है|

 

वैभवश्री की बैठकों का मुख्य साध्य समूह के सदस्यों में परस्पर विश्वास एवं आत्मीयता स्थापित करना  साथ ही  उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना , निर्णय क्षमता को सुदृढ़  करना एवं सदस्यों के अंदर सामाजिक एवं राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करना | इन बैठकों का उद्देश्य सदस्यों के बीच में  ‘मै के जगह हम’ का भाव विकसित करना और ऐसे मानशिकता का निर्माण करना जहां समूह केवल सहायता लेने के लिए ही नहीं बल्कि आवश्यकता होने पर समाज को देने के लिए भी सक्षम हो|

 

 

 

वैभवश्री समूहों की विशेषताएं

 

१. समूह की नियमित साप्ताहिक बैठक |

२. आर्थिक लेन देन में अनुशासन का कड़ाई से पालन करना |

३. हर एक सदस्यों  द्वारा दायित्व का निर्वाहन करना |

४. सामाजिक सेवा उपक्रमों, सेवाकार्य के बारे में चिंतन, उपक्रम,सेवाकार्य चलाना |

५. समूह की बैठक में राष्ट्रभाव जगाने वाले गीत, कथा, संकल्प, समाचार समीक्षा आदि का समावेश |

६. आर्थिक विकास के साथ व्यक्तित्व विकास करने वाली कार्यपद्धति |

७. सामाजिक परिवर्तन का माध्यम |

८. कुटीर उद्योग लगाना | 

९. समूह का धन समूह  में ही  रखना ,(समूह में बनाया हुआ उत्पाद समूह के सदस्यों को  खरीदना)

१०. साल में एक बार हिसाब का ऑडिट (Audit) करना |